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Friday, 24 January 2014

आत्मविश्वास

आत्मविश्वास


Hello दोस्तोँ, आशा है आप सब ठीक होँगे।
आज हमारा Topic आत्मविश्वास पर Based है। आज इस Post मेँ हम Self-Confidence के बारे मेँ थोड़ी चर्चा करेँगे।
Friends, Successful बननेँ के लिये जो चीज सबसे ज्यादा जरूरी होती है वो है हमारा आत्मविश्वास।
First thing आत्मविश्वास क्या है? ये प्रश्न बहुतोँ के मन मेँ उठ रहा होगा।
आत्मविश्वास दो Main words आत्म और विश्वास से मिलकर बना है। आत्म Means स्वयं और विश्वास Means भरोसा। कहनेँ का सीधा मतलब आत्मविश्वास, हमारा, हमारे स्वयं पर होनेँ वाला पुरा भरोसा या विश्वास है।
आज एक आदमी शारीरिक व मानसिक दोनोँ रूप से अस्वस्थ होते हुये भी सफलता के Registor मेँ अपना नाम दर्ज कर देता है और इसका Main Reason आत्मविश्वास ही होता है। Self confidence के चलते ही आज बड़े बड़े Leader महान कार्य करते हैँ। लिँकन जिनको पुरी दुनिया सलाम करती है 15 बार चुनाव हारनेँ के बाद राष्ट्रपति बनेँ और उनके सफलता का Secret और कुछ नहीँ सिर्फ आत्मविश्वास ही था। अपनेँ ऊपर विश्वास के चलते ही आज दिल्ली के वर्तमान C.M. Mr. अरविँद केजरीवाल मुख्यमंत्री बनेँ क्योँकि उन्हेँ पुरा विश्वास था कि वो C.M. जरूर बनेँगे
और देश को पुरा बदल देँगे। And आज पुरी दुनिया उनके काम को सराह रही है, उनके सफलता का Secret और कुछ नहीँ बल्कि सिर्फ Self confidence ही है।
इसमेँ कोई Doubt वाली बात नहीँ है कि सफलता पानेँ पर जिसे विश्वास होता है उसे सफलता जरूर मिलती है।
आत्मविश्वास वो शक्ति है जिससे सफलता की ऐसी गाथा लिखी जा सकती है जो अब तक नहीँ लिखी गई।
आत्मसंशय (Self-doubt)
Means अपनेँ आप पर, स्वयं पर शक करना, संदेह करना। आज एक शारीरिक व मानसिक रूप से Healthy व्यक्ति भी अपनेँ आप पर Doubt करके, अपनेँ आत्मविश्वास की कमी के कारण Success के Registor मेँ अपना नाम दर्ज करवानेँ से चुक जाता है। आज इसी आत्मसंशय की वजह से बहुत लोगोँ के जुबान पर एक बात सुननेँ मेँ आती है कि 'हमसे ये नहीँ होगा, हम नहीँ कर पायेँगे।'
और अपनेँ इस स्वयं पर शक के कारण ही लोगोँ को सफलता नहीँ मिल पाती और Self doubt की वजह से ही असफल हो जाते हैँ। इसलिये दोस्तोँ इस Article को पढ़नेँ के बाद आप इस एक वाक्य "मुझसे ये नहीँ होगा, मैँ नहीँ कर सकता।" इसको अपनी Dictonary से निकाल ही दीजिये यही उचित है और इसके जगह मेँ एक नया वाक्य Use मेँ लाइये कि "मैँ जरूर कर सकता हूँ। कोई दुसरा कर सकता है, सफल हो सकता है तो मैँ क्योँ नहीँ हो सकता।"
आज ही अपनेँ अंदर के सोये हुये विश्वास को जगायेँ। मैँ नीचे कुछ बातेँ आपके सामनेँ रखुँगा जिसको पढ़नेँ के बाद आप मेँ बहूत Changes आयेँगी।

आत्मविश्वास और आत्मसंशय दोनोँ भाई हैँ लेकिन दोनोँ मेँ जमीन आसमान का अंतर है। कैसे देखिये-
(1.) आत्मविश्वास से सफलता आपके हाथ थामेगी और आत्मसंशय से सिर्फ असफलता आपके हाथ लगेगी।
(2.) आत्मविश्वास से आप जो कुछ करना चाहते हैँ कर पायेँगे लेकिन आत्मसंशय से आप बस हाथ मलते रह जायेँगे।
(3.) आत्मविश्वास से जीतनेँ का जुनुन पैदा होगा और आत्मसंदेह से हारनेँ का डर।
(4.) आत्मविश्वास से आप अपनेँ मुँह से हमेशा I CAN शब्द को उपयोग मेँ लायेँगे और आत्मसंशय से आप I Can't शब्द का Use करेँगे।
(5.) आत्मविश्वास से आपकी सफलता मेँ आनेँ वाली बाधायेँ हटेँगी और आत्मसंशय से सफलताओँ मेँ बाधायेँ Create होँगी।
(6.) आत्मसंशय से निराशा हाथ लगेगी और आत्मविश्वास से निराशा कोसोँ दुर रहेगी।
(7.) आत्मविश्वास से आप चलते जायेँगे रूकेँगे नहीँ लेकिन आत्मसंशय से आप कदम बढ़ाकर पीछे हट जायेँगे या कदम तो बढ़ेँगे लेकिन पीछे की ओर।
(8.) आत्मविश्वास से उत्साह पैदा होगा और आत्मसंशय से आप निरोत्साहित, हतोत्साहित होँगे।
(9.) आत्मविश्वास से अपनेँ अंदर प्रसन्नता खुशी पैदा होगी, वहीँ आत्मसंशय से आप टुटनेँ लगेँगे, मुर्झा जायेँगे।
(10.) आत्मविश्वास से Impossible को भी Possible कर पायेँगे लेकिन आत्मसंशय से Possible भी Impossible हो जायेगा।

Friends इन Points को पढ़नेँ के बाद चुनाव आपका है कि आप अपनेँ ऊपर विश्वास करके Successful बनेँगे कि अपनेँ ऊपर Doubt करके असफलता का दामन थामेँगे।
दोस्तोँ आत्मविश्वास को बरकरार रखेँ क्योँ इससे भले ही सफलता देरी मिले लेकिन इतना यकीन से कहता हूँ कि आप असफल तो नहीँ होँगे।
Self confidence को कमजोर होनेँ मत देँ क्योँकि यही आपको चुनौतियोँ से जुझनेँ की हिम्मत देगा आपको सफल बनायेगा। कोई आप पर विश्वास करे या न करे आप अपनेँ आप पर विश्वास करेँ कि हाँ मैँ जरूर सफल होऊँगा और मैँ अपनेँ Confidence को टुटनेँ नहीँ दुँगा।
इस सिध्दांत को अपनायेँ कि
"आत्मविश्वास हमारी वो ताकत, वो शक्ति है जिससे पुरी दुनिया को जीता जा सकता है।"
..

आज स्वामी विवेकानंद जी का जन्मोत्सव दिवस है और युवा दिवस भी है उनके जन्मदिवस के अवसर पर स्वामी जी के एक बात को सभी युवाओँ से कहना चाहूँगा कि-
"Everything is Easy when we are Busy..
and Nothing is Easy when we are Lazy.."

दुनिया मेँ हर चीज आसान है, हर चीज संभव है लेकिन कब जब इंसान अपनेँ आप पर, स्वयं पर विश्वास करके उस काम मेँ व्यस्त हो जिसको करके वो सफलता पाना चाहता है और दुनिया मेँ कुछ भी संभव नहीँ जब इंसान हार मानकर बैठ जाये, और उठे नहीँ, निराश होकर आलसी बन जाये।
....So friends आज उनके जन्मदिवस पर आप अपनेँ आपसे ये Promis करेँ कि आप ऊपर बताये इस कथन का पालन करेँगे और कभी हार नहीँ मानेँगे और डटे रहेँगे।


स्वामी जी के Article पढ़नेँ के लिये आप AKC पर जरूर Visit कीजियेगा। आपको विवेकानंद जी के Best quote (कथन), लेख वहाँ पर मिल जायेंगे।

आपको यह Article कैसे लगा Please comment के Through जरूर बताइयेगा And अपनेँ Facebook friends के साथ जरूर Share कीजियेगा।
जल्द ही आत्मविश्वास के कुछ और Topic के साथ Next article मेँ मिलेँगे। तब तक आप अपना, अपनेँ Family, society का ध्यान रखेँ।
धन्यवाद!
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विकी खबर

संगति

संगति


Hello दोस्तोँ, आशा है आप सब ठीक होँगे।
आज इस Article मेँ हम 'संगति' के Topic पर थोड़ी चर्चा करेँगे And इस पोस्ट को पढ़नेँ के बाद आप स्वयं समझ जायेँगे कि कौन हैँ जो आपकी सफलता मेँ बाधक बनकर खड़े हैँ। और कौन हैँ जो आपको सही रास्ता दिखा सकते हैँ, So lets start..
Friends इस Life मेँ सफल होनेँ के लिये ये बात बहुत ही ज्यादा मायनेँ रखती है कि आपकी संगति कैसी है Means आप कैसे लोगोँ के साथ रहते हैँ, किनके साथ घुमते-फिरते हैँ। हम या आप अपनेँ मम्मी-पापा, भाई-बहन को अपनीँ मर्जी के मुताबिक नहीँ चुन सकते, But इस Life मेँ आपके Friends कैसे हैँ, कौन हैँ? इसको Choose आप ही करते हैँ, चाहकर या न चाहकर भी।
आज हमनेँ कई व्यक्तियोँ के मुँह से एक बात सुनी है कि हम संगति के चलते ही इतनेँ बड़े मुकाम तक पहूँचे हैँ। और कई लोगोँ से ये बातेँ भी सुननेँ मेँ आईँ हैँ कि आज संगति के चलते ही हम सफल नहीँ हो पाये, असफल हो गये।
और इन नतीजोँ पर यदि गौर किया जाये तो एक बात पुरी तरह से साफ है कि आपके सफल और असफल होनेँ मेँ कहीँ न कहीँ संगति का विशेष स्थान जरूर होता है। इंसान जिन लोगोँ के साथ रहता है, धीरे-धीरे
उसके अंदर न चाहकर भी वैसे ही गुण पैदा हो जाते हैँ, चाहे वो गुण अच्छे होँ या बुरे।
कई लोग तो ऐसी बातेँ भी करते हैँ कि हमारा विश्वास इतना मजबुत है जिससे यदि हमारी संगति गलत भी हो पर उनके बुरे गुण हममेँ नहीँ आयेँगे, और वो सोँचते हैँ कि भले ही साथी बुरे होँ लेकिन अपना आचरण तो श्रेष्ठ ही बना रहेगा।
दोस्तोँ मुझे नहीँ लगता कि आप भी ऐसा सोँचते होँगे लेकिन यदि आप ऐसा सोँच रहे हैँ तो हमेँ लगता है कि आपकी सफलता की गाड़ी एकदम Slow ही चलेगी या हो सकता है कि गाड़ी रास्ते मेँ ही बंद पड़ जाये।
बहूत से किताबोँ मेँ आपनेँ पढ़ा ही होगा कि अच्छे आचरण और अच्छे स्वभाव वाले व्यक्ति पर गलत संगत का कोई Effect नहीँ पड़ता But हमेँ लगता है ये बातेँ शायद पुर्णत: सही नहीँ हैँ क्योँकि अच्छे आचरण भले हि आप मेँ होँ लेकिन बुरी संगति के चलते आपको पछताना पड़ सकता है।
यदि आपकी संगति बुरी है तो आप भी बुरी नजर से ही देखे जा सकते हैँ। किसी का मित्र चोर होगा तो भले ही उसनेँ चोरी न की हो But Future मेँ उस पर भी Doubt जरूर किया जायेगा। संगति का इंसान पर बहूत गहरा प्रभाव पड़ता है, यदि आप Positive thinking वाले हैँ लेकिन आपके Friend, Negative सोँच रखनेँ वाले हैँ, तो आगे चलकर आप भी धीरे धीर Negative सोँच रखनेँ वाले बन जायेँगे। यदि आपके दोस्त निराशावादी हैँ तो कल आप भी इसका शिकार हो सकते हैँ।
Friends, यदि आपको पंजाब जाना है तो आप पंजाब जानेँ वाले साथियोँ के साथ ही ट्रेन मेँ बैठेँगे तभी आप पंजाब पहूँचेँगे न कि उड़ीसा जानेँ वाले ट्रेन के साथियोँ के साथ जायेँगे। ठीक उसी प्रकार यदि आप अपनेँ मंजिलोँ को पाना चाहते हैँ, तो आपको उन लोगोँ का साथ चुनना होगा जो आपको अपनी मंजिलोँ को पहूँचानेँ मेँ आपकी मदद करेँ, आपका साथ देँ।

Friends यदि आपको अपनेँ मुकाम, अपनेँ मंजिल तक पहूँचना है तो इन साथियोँ का पुरी तरह से साथ छोड़ना होगा-
(1.) जो आपके Positive thinking को Negative feel करानेँ मेँ ही लगे रहते हैँ।
(2.) जो आपकी गलत आदतोँ पर टोकनेँ की बजाय उल्टा सराहना करते हैँ।
(3.) जो खुद गलत काम करते हैँ, साथ ही इस कार्य मेँ आपकी सहयोग भी मांगते हैँ।
(4.) जो अपनेँ मम्मी-पापा को Respect नहीँ देते, उनका अनादर करते हैँ।
(5.) जो दुसरोँ के बारे मेँ गलत बातेँ करते हैँ, अफवाहेँ फैलाते है और पीठ पीछे बुराई करते हैँ।
(6.) जो दुसरोँ को धोखा देते हैँ और आपसे वफादारी के वादे करते हैँ।
(7.) जो खुद तो बड़ा नहीँ सोँचते और आपकी बड़ी सोँच का मजाक उड़ाते हैँ।
(8.) जिसके लिये इंसानियत, संबंधोँ को कोई Value नहीँ, बल्कि जो सिर्फ पैसोँ को ही Value देता हो।
(9.) जो दुसरोँ की बातेँ कभी न सुनता हो बस अपनी मन मर्जी ही करे।
(10.) जो बार-बार बीते पुरानी गलतियोँ को दुहराकर आपको कमजोर बनाये।
(11.) जो जीवन मेँ अच्छी बात तो सोँचते नहीँ उल्टा अपशब्दोँ का प्रयोग करते रहते हैँ।
(12.) जो आवश्यकता के समय आपकी सही कार्य मेँ मदद करनेँ के बजाय पीठ दिखाकर भाग जाये।

Friends ऊपर बताए गये लोग किसी भी प्रकार के संबंध बनानेँ लायक नहीँ हैँ, आप एक Society मेँ रहनेँ वाले आम लोग ही हैँ न कि संत। यदि संत जैसे महान हैँ तो आप ऐसे लोगोँ को बदलनेँ की कोशिश कर सकते हैँ नहीँ तो इनको छोड़ना या इनसे दुरी बनाना ही बेहतर होगा।

यदि आपको सफल होना है तो ऐसे लोगोँ का चुनाव करना चाहिये जिन्होँने Life मेँ कुछ बड़ा Achieve किया है, जो आपको Success के बारे मेँ कुछ सिखा सकेँ। आप उन लोगोँ के साथ रहिये, उनसे संपर्क बनाइये जो आपको एक अच्छा और सफल इंसान बनानेँ के गुण आपसे Share करेँ। ऐसे लोगोँ से Contact रखेँ जो आपकी हौसला बढ़ायेँ, और आपको सही रास्ता बतायेँ। जीवन मेँ आगे बढ़नेँ के लिये एक Guidelines की जरूरत होती ही है So ऐसे Friends बनायेँ जो टांग खीँचनेँ की बजाय आपकी मदद करेँ न कि केँकड़ा की तरह बनेँ।
Friends यदि आपको अभी तक ऐसे लोगोँ से परिचय नहीँ हुआ जो आपको सही रास्ता बतायेँ तो आप रूकिये मत, घर मेँ बैठकर अवसर का Wait करनेँ के बजाय अपनेँ लक्ष्य की तरफ फोकस कीजिये, आपको कहाँ जाना है इस बारे मेँ Decide करिये And आपको मंजिल तक पहुँचानेँ मेँ कौन Guide कर सकता है उन्हेँ ढुंढिये, परिचय बनाइये क्योँकि किसी को अपनेँ लक्ष्य के बारे मेँ बताकर सुझाव माँगना, किसी की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाना, अपनी कोई समस्या बताना कोई शर्मिँदगी की बात नहीँ है। हजार लोगोँ मेँ कोई एक ही होगा जो आपकी मदद न करे या आपको कोई सुझाव न दे।
Friends अब आपकी Responsibility है कि आप कैसे लोगोँ के साथ रहना पसंद करेँगे। 
जिन लोगोँ से आप दुर रहना चाहते हैँ, जो आपकी सफलता मेँ बाधा बन रहे हैँ उनका एक गंभीरतापुर्वक सोँचकर List बनाइये और जो Possible हैँ उन्हेँ छोड़नेँ की कोशिश कीजिये या उनसे सिर्फ काम से काम रखिये। And जो Successful बन चुके हैँ Positive thinking वाले हैँ, जो आपको सही दिशा के बारे मेँ बता सकेँ। उनसे जल्दी से जल्दी Friendship कीजिये और अच्छे संगति Choose करके अपनेँ आपको भी सफल बनाइये।
इस सिध्दांत को अपनाये कि "संगति वो है जो आपकी और दुसरोँ के सफलता की गति को बढ़ाए न कि गति को कम करे।"

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धन्यवाद!
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विकी खबर

Monday, 20 January 2014

अधिकतर लोग नहीं जानते, कैसे और कौन हैं 33 करोड़ देवी-देवता

उज्जैन। आमतौर एक प्राचीन धारणा है कि हमारे 33 करोड़ देवी-देवता हैं, यानी देवी-देवताओं की संख्या 33 करोड़ बताई जाती है। ये बात कम ही लोग जानते हैं कि 33 करोड़ देवी-देवता कैसे बताए गए हैं और इनमें कौन-कौन से देवता शामिल हैं।
शास्त्रों के अनुसार देवताओं की संख्या 33 कोटि बताई गई हैं। यहां कोटि शब्द का अर्थ है प्रकार, यानी 33 प्रकार के देवता बताए गए हैं। इसी शब्द 33 कोटि को 33 करोड़ माना जाने लगा है।
पुराने समय से ही 33 कोटि देवता की गणना 33 करोड़ देवी-देवताओं के रूप में की जाती रही है। इन 33 कोटियों में आठ वसु, ग्यारह रुद्र, बारह आदित्य, इंद्र और प्रजापति शामिल हैं। इन्हीं देवताओं को 33 करोड़ देवी-देवता माना गया है।
यहां इंद्र और प्रजापति के स्थान पर कुछ विद्वानों द्वारा दो अश्विनी कुमारों को शामिल किया जाता है।
इस प्रकार कुल 33 करोड़ देवता नहीं हैं बल्कि 33 प्रकार के प्रमुख देवता बताए गए हैं।
ये हैं 12 आदित्य के नाम
- धाता
- मित
- अर्यमा
- शक्र
- वरुण
- अंश
- भग
- विवस्वान
- पूषा
- सविता
- त्वष्टा
- विष्णु
ये हैं अष्ट वसु के नाम
- धर
- ध्रुव
- सोम
- अह
- अनिल
- अनल
- प्रत्युष
- प्रभाष
ये हैं ग्यारह रुद्र
- हर
- बहुरूप
- त्र्यम्बक
- अपराजिता
- वृषाकपि
- शम्भू
- कपर्दी
- रेवत
- म्रग्व्यध
- शर्व
- कपाली

 बारह आदित्य, ग्यारह रुद्र और अष्ट वसु के साथ ही 2 अश्विनी कुमार हैं। इन सभी देवताओं की संख्या का योग 33 है और इन्हीं 33 प्रकार के देवताओं को 33 करोड़ देवी-देवता माना जाता है। कोटि शब्द के दो अर्थ हैं पहला है करोड़ और दूसरा अर्थ है प्रकार। अत: यहां कोटि शब्द का अर्थ करोड़ माना जाने लगा, जिससे देवताओं की संख्या 33 करोड़ हो गई।
आप को कैसा लगा ये article कमेंट please
 

Friday, 17 January 2014

तुम बनोगे CEO...../motivational-stories

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एक बहुत बड़ी company के CEO जल्द ही retire होने वाले थे.
वो इस company को बहुत ही मेहनत से इस मुकाम पर लाये थे. इसलिए वो चाहते थे की किसी काबिल व्यक्ति को ही अपना उत्तराधिकारी बनाए.
इसके लिए उन्होंने अपने company में कार्य करने वाले सभी होनहार युवाओं की एक मीटिंग बुलाई.
उन्होंने उस मीटिंग में सभी को एक-एक पोधे का बीज दिया.
और कहा- ” इस बीज को आप लोग घर ले जाकर एक गमले में रोपे, इसकी देखभाल करें, इसे पानी दे, नियमित धूप दे, और एक साल बाद जिसका भी पौधा सबसे अच्छा होगा. उसे company का भावी CEO नियुक्त किया जाएगा.
सभी कार्यकर्ता इस बात से बहुत खुश हुए, सभी को यकीन था की वो ही इस प्रतियोगिता में विजय होगे.
इन्ही में से एक काबिल नौजवान लड़की थी ‘भावना’. उसे भी इसमें बड़ा interest आया.
जैसे ही ऑफिस से छुट्टी हुई, वो रास्ते में एक छोटा प्यारा गमला ख़रीद लायी. और घर जाते ही उस बीज को उस गमले में रोप दिया.
उसने अपने पापा को भी सारी बात बताई. और उसके पापा भी उसके साथ खुश हुए. पर उन्होंने उसे ये भी सलाह दी की वो अपने काम पर भी पूरा ध्यान दे. इस बीज के साथ साथ, अपने office के हर कार्य को संपूर्ण लगन से करे..
कुछ दिन बीत गए.. भावना रोज गमले में पानी देती, उसका पूरा ध्यान रखती. पर उसमे से कुछ भी नहीं निकलता.
1 हफ्ता गुजरा, 2 हफ़्ते गुजरे, 1 महीना हो गया.. पर वो बीज अंकुरित नहीं हुआ..
भावना बहुत उदास हुई.. पर वो अपने काम में मन लगाये हुए थी..
6 महीने बाद भावना ने अपने बचपन के दोस्त से शादी कर ली.. और अपने नए घर में अपना गमला भी लेकर आई..
समय बीतता गया.. गमले में कुछ भी नहीं उगा.. भावना को रोज गमले में पानी डालते देख, उसके पति ने भी उससे सवाल किया की आखिर ये है क्या?
तब उसने उसे सबकुछ बता दिया. उसने भावना को परेशान न होने की सलाह दी और काम करते रहने को कहा..
धीरे धीरे वो दिन भी आ गया. जब सभी को company में अपने अपने पौधे लेकर आने थे.
भावना ने अपने पति से कहा की वो इस ख़ाली गमले के साथ company नहीं जा सकती. ऐसे तो उसकी बहुत बैज्ज़ती होगी.
उसके पति ने उसे समझाया की उसे honest रहना चाहिए. और जो हुआ उसे फेस करना चाहिए.
भावना ख़ाली गमला लेकर company गयी.
उसे इस तरह देख सभी ने उसका मजाक उड़ाया. तभी meeting start हो गयी. company के CEO ने सभी के हरे भरे गमले देख फक्र से कहा, “मुझे आप सभी पर गर्व है. आपने अपने पौधों का बहुत ही अच्छा ख्याल रखा है.”
पर जैसे ही भावना का गमला देखा.. उन्होंने उससे पूछा की आखिर उसका गमला ख़ाली क्यों है?
भावना ने उन्हें सबकुछ सच सच बता दिया.
CEO ने भावना को छोड़ सभी को बैठने के लिए कहा.
और announce किया “आज से आपकी नयी CEO है भावना शर्मा”
सभी हैरान हो गए.
“आखिर ये CEO कैसे बन सकती है? इसका तो पौधा उगा भी नहीं.” सभी ने सवाल उठाये.
तब वृद्ध CEO ने कहा- “दरअसल, एक साल पहले मैंने आप सभी को जो बीज दिए थे. वो उबले हुए थे. उनमे जान ही नहीं थी. उनमे से पौधा उगाया ही नहीं जा सकता था. केवल भावना ने ही सच्चाई सामने रखी. और इसीलिए यही CEO पद की असली हक़दार है.”

मैंने अपनी इस छोटी सी life में बहुत सारे छोटे बड़े झूट बोले होगे. पर मैं सभी को स्वीकार भी करता हूँ की “हाँ, मैंने ऐसा किया.”
सभी को ऐसा करना चाहिए. सच बेहतर होता है.

आपको ये कहानी कैसी लगी? 
हमे comments में जरुर बताये.